इश्वर? गुरू ? चेतना? आत्मा? मातपिता ? पत्नी? मित्र ? अपने कर्म? आपका शरीर ?…जी नही. 

हम अकेले ही आए हैं और अकेले ही जायेंगे। जीवन के रास्ते में कुछ लोग मन को भा जाते हैं।

 लेकिन वो भी अकेले ही हैं।

अपने आप से दोस्ती कीजिये, क्योंकि आप खुद ही अपने सच्चे मित्र हैं।

और इससे भी हमारा सच्चा दोस्त हमारा 'बुद्धि' 

'बुद्धि' हमारे जिवन का सच्चा साथी है यह कभी आपको  धोखा नही देगा|

लेकिन बुद्धि तेज होनी चाहिए ...

और जिवन के सबसे मुशकिल घऱी मे आपका सहयोग करेगा|


मुसीबत में यदि हम अपना आपा न खोएं तथा अपने दिमाग को संतुलित रखें तो हम खुद मुसीबत से निबट सकते हैं ।

पुराने जमाने की बात है कि एक व्यक्ति सुबह 2 पानी का लोटा लेकर शौच के लिए जंगल की तरफ गया ।

शौच के बाद जब वह वापिस घर लौट रहा था रास्ते मे एक उग्र रूप धारण किए हाथी उस के पीछे पड़ गया ।

कुछ दूर तो वह व्यक्ति भागा, लेकिन हाथी लगातार पीछा कर रहा था ।

उसे अब अपनी मौत सामने नजर आ रही थी ।

इतने में उसने सोचा और जब हाथी जोर से चिंघाड़ता हुआ उसके नजदीक आया उसने हाथी के मुँह में लोटा फेंक दिया ।

लोटा पेट में जाने से हाथी वापिस चिंघाड़ता हुआ जंगल की तरफ भाग गया ,और उस व्यक्ति की जान बच गई ।


नोट: उपरोक्त लेखलेखक के अपने विचार हैं इससे सहमत या असहमत होने का हर किसी को अपना अधिकार सुरक्षित है