कई बार लोग अपनी व सामने वाले की उम्र, रिश्ता एवं वरिष्ठता के बारे में सोचे बगैर चाहे जो बोल देते हैं तथा मौका आने पर उसे मजाक कह देते हैं। ये आपके व सामने वाले के संबंधों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे आपकी प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है। अपने बॉस, बुजुर्ग, गुरु इत्यादि से बातें करते समय उनकी इज्जत का सदैव ध्यान रखें।

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है आज मैं आपको

एक ऐसी कहानी बताऊंगा जिसे सुनने के बाद आपका
दिल सहम सकता है तो अगर अपने थोड़ा अपने दिल को संभाल लिया
तब तो इस कहानी को आप सुनिए

एक बार एक पिता अपने 22 साल के नौजवान पुत्र के साथ
 ट्रेन से कहीं जा रहे थे जैसे ही ट्रेन में बैठे तो उनके बेटे ने उनसे
 खिड़की वाली सीट पर बैठने के लिए आग्रह किया तो पिता ने
अपने बेटे की बात को रखते हुए
उसको खिड़की वाली सीट दे दी 

दोनों पिता पुत्र  कुछ देर बाद अजीब सी  हरकत करने लगे
बगल में बैठी महिला सोच रही थी कि ये 
क्या हो रहा है 
हो सकता है कि यह मजाक कर रहे हो


लेकिन जैसे ही ट्रेन चली तो उस बेटे ने कहा कि पापा देखो पेड़
 पीछे छूट रहे हैं सब लोग पीछे छूट रहे हैं हम आगे बढ़ रहे हैं
उस महिला से रहा नहीं गया भाई साहब अगर
आप बुरा ना माने तो आपको एक बात  कहे 

पिता ने कहां  
कहिये 

आपके बेटे को इस तरीके की प्रॉब्लम है तो
आप एक अच्छे से डॉक्टर को क्यों नहीं दिखा लेते मेरे समूह  में एक डॉक्टर है
आप कहे  तो मैं आपकी बात डॉक्टर से करवा  देती हूं

आदमी का क्या जवाब था सुनिए 

उसने कहा कि हम इसे डॉक्टर के पास ही दिखा कर आ रहे हैं
 मेरे बेटे की बचपन से देखने लायक आंखें नहीं थी यह अंधा था
और आज ही उसकी आंखें ठीक हुई है तो इसलिए ऐसी हरकतें कर रहा है
क्योंकि इसमें दुनिया आज देखी है

 महिला नजर मिलाने लायक नहीं  रही 

मतलब आप सामने वाले को उसकी बुरी कंडीशन में देखते हुए
आप उसको हंस रहे हो तो
यह तो ठीक नहीं है ना 
इसलिए इस कहानी के माध्यम से मैं यह कहना चाहता था कि कभी भी
दूसरों की किसी भी सिचुएशन हो आप 
उनके बारे में गलत ना सोचे

लोगों को जज करना छोड़िए

हमेशा हो सकता है कि आप जिस दृष्टिकोण
 से लोगों को देख रहे हैं वह वैसे है नहीं 
तो आशा करता हूं कि आपको समझ आ गई होगी
आपका कीमती समय देने के लिए  शुक्रिया

मजाक करें सोच-समझकर

कई बार लोग किसी के प्रति मन में कड़वाहट पाले बैठे रहते हैं व समय आने पर सार्वजनिक रूप से उसे उजागर करते हैं, फिर बुरा लगने पर कहते हैं कि उन्होंने तो मात्र मजाक किया था।

शारीरिक या मानसिक कमजोरी, गरीबी, अशिक्षा इत्यादि को निशाना न बनाया जाए। ये मानवीय व नैतिक दृष्टि से ठीक नहीं है। मजाक किसी को दुःखी करने के लिए नहीं किया जाता