इंदौर:
 देश में पेट्रोल और डीजल के दाम हर दिन महंगाई के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। पेट्रोल की कीमत 104.36 रुपये पर पहुंच चुकी है, जबकि शासन के न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर किसान के गेहूं की कीमत 1975 रुपये प्रति क्विंटल या करीब 20 रुपये किलो है। इस तरह पेट्रोल और अनाज की तुलना करें तो सवा पांच किलो गेहूं बेचकर केवल एक लीटर पेट्रोल हासिल किया जा सकता है।ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखिए कि एक बार सौ रुपये का आंकड़ा पार करने के बाद भी पेट्रोल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 

एक साल में ईंधन के दामों का हिसाब-किताब लगाएं तो पेट्रोल 23.26 रुपये और डीजल 24 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है। दरअसल, एक साल पहले 12 जून, 2020 को पेट्रोल की कीमत 81.10 रुपये प्रति लीटर थी, जो 12 जून, 2021 को 104.36 रुपये हो चुकी है। पेट्रोल के साथ ही डीजल भी महंगाई की 'ऊंची कूद' में बराबर शामिल रहा। एक साल पहले डीजल सिर्फ 71.68 रुपये प्रति लीटर के भाव में मिल रहा था, तो अब यह 95.69 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है.इंदौर पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्रसिंह वासु का कहना है कि लाकडाउन के कारण वैसे ही पेट्रोल व डीजल का बिक्री बहुत कम हो चुकी है। 

लगातार ईंधन महंगा होने से और विपरीत असर पड़ेगा। सरकार को एक्साइज ड्यूटी और वैट कम करना चाहिए। फेडरेशन आफ मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पारस जैन ने बताया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल पम्पों की बिक्री तो घटी है, लेकिन कर्मचारियों का वेतन और बिजली का खर्च बढ़ गया है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर अधिक वैट होने से अधिकांश ट्रांसपोर्टर उत्तरप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से ही डीजल भरवाकर आते हैं। इससे मध्यप्रदेश के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।